अनोखा उत्तरप्रदेश विशेष कानूनों के तहत अपराधियों को दण्डित करने में मायावती की सफलताओं की अखिल भारतीय परिपेक्ष में गाथा

अनोखा उत्तरप्रदेश  विशेष कानूनों के तहत अपराधियों को दण्डित करने में मायावती की सफलताओं की अखिल भारतीय परिपेक्ष में गाथा

अनोखा उत्तरप्रदेश: विशेष कानूनों के तहत अपराधियों को दण्डित करने में मायावती की सफलताओं की अखिल भारतीय परिपेक्ष में गाथा 

प्रो अवाथी रमैया वर्तामान में टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान, मुंबई के सामाजिक बहिष्कार एवं समावेशक नीति अध्ययन केंद्र में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। आपने १९८४ में लाँयला काँलेज , मद्रास विश्वविधालय से एम ए (कार्य समाज) की उपाधि प्राप्त की। १९८७ में एम फिल (जनसंख्या आध्ययन) और १९९९ में पी एच डी (समाज शास्त्र) उपाधियाँ जवाहरलाल नेहरू विश्वविधालय से प्राप्त की। आपके शोधकार्य का व्यापक दायरा जाति एंव विकास के पहलुओं पर केंद्रित है। आप २००९-२०१० के बीच कालंबिया विश्वविधालय के नृविज्ञान विभाग में वरिष्ठ पूर्ण उज्जवल (फूल ब्राईट) छात्र कार्यक्रम के तहत फूल ब्राईट विहजिटिंग फेलो रहे। २०१० में आप हुल्ल विश्वविधालय, यु के  के विहजिटिंग फेलो रहे। इसी वर्ष आप लन्दन स्कूल ऑंफ इकाँनामिक्स  के एशिया अनुसंधान केंद्र में भी विहजिटिंग फेलो रहे हैं। जनवरी २०१५ में आप जवाहरलाल नेहरू विश्वविधालय, नई दिल्ली के सैंटर फार द स्टडी आँफ सोशन सिस्टम्स,स्कूल आँफ सोशल साइंसेस में भी विहजिटिंग फेलो रहे हैं। आपने विभिन्न प्रकार की सभा-सम्मेलनों में भाग लेने हेतु भारत एंव विदेश की भरपूर यात्राये की हैं और असंख्य व्याख्यान दिया है और कई किताबें लिखी है।

संजय इंगोले वर्ष २०११ से जामिया मिल्लिया इस्लामिया,नई दिल्ली के समाज कार्य विभाग में सहायक प्राध्यापक हैं। आपने १९९८ में कृषि विज्ञान में स्नातक पदवी प्राप्त की। वर्ष २००० में टाटा इंस्टीट्यूट ऑंफ सोशल साइंसेज, मुंबई से एम ए (समाज कार्य) की उपाधि समाज कल्याण प्रशासन की विशिष्टा से प्राप्त की। वर्ष २००७ में जवाहरलाल नेहरू विश्वविधालय, नई दिल्ली की समाज विज्ञान शाला के सामाजिक व्यवस्था अध्ययन केंद्र से एम फील की उपाधि प्राप्त की और वर्ष २००९ से २०११ तक दिल्ली विश्वविधालय के दिल्ली समाज कार्य विभाग में सहायक प्रध्यापक रहे। अकादमिक व्यस्तता के साथ-साथ आप फूले-अंबेडकारी आंदोलन के सक्रिय कार्यकर्ता भी है।

प्रस्तावना प्रो अवाथी रमैया द्वारा लिखित यह पुस्तक बहन मायावती, पूर्व मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश द्वारा सामाजिक न्याय की राह में उठाये गये कदम का रहस्योघाटन करती है। अनुसूचित जातियों हेतु, अनुसूचित जाति एव जान जाति अपराध विरोधक कानून १९८९ के अन्तर्गत जो कदम मायावती सरकार ने उठाये  बगैर अनुसूचित जाति एव जान जाति को न्याय दिला पाना मुश्किल ही नहीं नामुम्किन था।  और विशेष कर इस कानून के अन्तर्गत जिस तरह से अपराधियों को दण्डित किया गया वह आप में पुरे देश के अन्य राज्यों के लिये उदाहरण है। प्रो रमैया ने आंकड़ों के आधार पर यह प्रमाणित किया है कि उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति पर हुए अत्याचारों के निवारण एवं अनुसूचित जाति को न्याय दिलाने में सभी राज्यों से आगे रहा है। इस कार्य को अंजाम अपराध को अपराधी पर सिद्ध कर किया गया।  वरना अक्सर होता यह है की रिपोर्ट तो लिख जाती है पर मुकद्दमा सुनवाई तक पहुँचता ही नहीं है। ऐसे में अनुसूचित जातियों के प्रति समर्पण दिखाता है। परन्तु दुःख इस बात का है कि मेन-स्ट्रिम मीडिया एवं शिक्षा विदों एवं समाज शास्त्रियों ने उत्तर प्रदेश से जुड़े हुए मायावती के इस प्रयास का कभी भी आंकलन नहीं किया। वे बस मायावती की सरकार को मूर्तियों एवं पार्क बनवाने के लिए कोसते रहे। उन्होंने सामाजिक न्याय के साथ-साथ विकास की बात कभी नहीं कही।  

इस संदर्भ में भी यह पुस्तिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रो रमैया ने अपनी तार्किता एवं अवलोकन से अनुसूचित जाति पर होने वाले अत्याचारों का तुलनात्मक अध्यन किया है। प्रमाणिक संस्थाओं के आँकड़ो के माध्यम से उन्होँने यह दिखाने का प्रयास किया है कि किस राज्य में अपराध सिद्ध होने की दर सबसे अधिक है। यहाँ २००१ से २००९ तक के आँकड़ों द्वारा यह दिखाया गया है कि उत्तर प्रदेश बसपा एवं मायावती के मुख्यमंत्रित्व काल में सभी प्रदेशों से आगे रहा। यह न्याय के प्रति उनके शासन की प्रतिबद्धता को भी प्रमाणित करता है।

प्रो रमैया ने इस पुस्तिका में यह भी उद्घाटित किया है कि इस पूरी प्रक्रिया द्वारा मायावती के अभिशासन में हिन्दू जातियों को शिक्षित करने का प्रयास भी किया गया है की वे अपनी जातिवादी एवं ब्राह्मणवादी मानसिकता का त्यागकर अनुसूचित जाति से समानता का व्यवहार करे।  ऐसा न करने पर उनको कड़े दंड का सामना करना पड़ेगा, ऐसा संकेत मायावती का शासन सभी को देता है। और इस तथ्य को प्रो रमैया नैतिकता से जोड़ते हैं। प्रो रमैया अपने तथ्यों से यह भी प्रमाणित करते हैं कि इससे पहले के नेताओं में इच्छाशक्ति का नितांत आभाव रहा। और वे केवल घड़ियाली आँसू बहाते ही देखे गये हैं परन्तु उनहोंने कोई ठोस कदम नहीं उठाये।

अन्त में इस पुस्तिका के अकादमिक चरित्र एवं प्रमाणिक आंकड़ों के वस्तुनिष्ट आँकलन के लिये प्रो रमैया विशेष बधाई के पात्र हैं।  उन्होंने तालिकाओं के माध्यम से जो तुलनात्मक आँकड़े प्रस्तुत किये हैं वे और भी काबिले तारीफ है। बाबा साहेब अम्बेडकर एवं अन्य तथ्यों के सन्दर्भों  से पुस्तिका की प्रमाणिकता एवं गुणवत्ता और भी निखार गयी है।

कुल मिलाकर यह पुस्तिका अकादमिक एवं एक्टिविस्ट दोनों लोगों द्वारा पढ़ी जानी चाहिये। विशेष कर राजनैतिक लोग वर्त्तमान समय में इसका पूरा लाभ उठायेंगे।  मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विशवास है कि भविष्य में प्रो रमैया इसी प्रकार ज्ञान का उत्पादन करते रहेंगे। सर्वोपरि दक्षिण भारतीय होते हुए भी उन्होंने उत्तर भारत के सामाजिक प्रक्रिया का का वस्तुनिष्ट आँकलन किया है। यह अपने आप में और भी सराहनीय है। अन्त में अनुवादक संजय इंगोले भी बधाई के पात्र हैं कि उन्होंने पुस्तिका की अकादमिक मूल्य को बनाये रखा जिससे इसका अनुवाद जन-सामान्य की समझ में आ सके। 

अनोखा उत्तरप्रदेश: विशेष कानूनों के तहत अपराधियों को दण्डित करने में मायावती की सफलताओं की अखिल भारतीय परिपेक्ष में गाथा 

ISBN 978-81-933128-2-7

Paperback/Pages- 72 

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  • Brand: AlterNotes Press
  • Product Code: 978-81-933128-2-7
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Tags: अनोखा उत्तरप्रदेश विशेष कानूनों के तहत अपराधियों को दण्डित करने में मायावती की सफलताओं की अखिल भारतीय परिपेक्ष में गाथा

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